Atal- Desh Ko Jode Rakhne Wali Ek Atal Soch

ये मैला नहीं हो सकता ।
ये देश महान था ,है और रहेगा ।”

By Shubhankar Upadhyay

15 अगस्त 2019 , ये दिन की समाप्ति हो चुकी है. पूरे देश ने हर्षोल्लास के साथ तिरंगा फहराया और 73 वें स्वतंत्रता दिवस को मनाया. चारों ओर बजते देशभक्ति गाने , लोगों के तिरंगे के साथ लगे फोटो,आजादी की कहानियां पढ़ सुनकर , मन में एक उत्साह और चेहरे पे खिलखिलाहट सी है|
लेकिन अब तारीख बदल चुकी है ,16 अगस्त 2019, अब मन थोड़ा भारी सा है, चेहरे की खिलखिलाहट भी सिकुड़ सी गई है |
आज हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री , पूरे देश के दुलारे, जननायक पंडित श्री अटल बिहारी वाजपई जी की पहली पुण्यतिथि है|
अटल जी इस देश की आजादी ,स्वाधीनता ,अखंडता और आबाद होने तक के सफर के एक मुख्य सिपाही रहे हैं।

1942 में अंग्रेज़ो भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने से लेकर यूनाइटेड नेशन में हिंदी भाषाण ,फिर एक कुशल प्रधानमंत्री बनने तक के सफर में उन्होंने इस देश के लिए कई अनगिनत अनमोल कार्य किए |

लेकिन मेरे उनके करीब होने का कारण उनकी कर्मठता से ज्यादा उनका मिज़ाज था.
उनके मिज़ाज को समझाने भर से मुझे कई प्रश्नों के उतार यूंही मिल जाते हैं|

आज जब मैं कुछ बौने बुद्धिजीवियों के बार बार कहे जाने वाले सवाल जिसमे में वो भारत देश को महानता को कटघरे में रख देते हैं , और देश में हो रहे कुरीतियों और दुर्घटनाओं को ही इस देश की एक मात्र तस्वीर बना देते हैं , तो मुझे अटल जी की इंटरव्यू में कही एक बात याद आती है।

जिसमे उन्हों ने रिपोर्टर के इसी सवाल की, क्या भारत सिर्फ कविताओं और नारों में ही महान है ?
तो अटल जी ने कहा
– “रिपोर्टर महोदय , अभी आप मुझसे सावरकर और
गांधी जी से जुड़े कुछ सवाल पूछ रहे थे। माफ कीजिएगा , जो आपने सुनना चाहा , मैंने वो नहीं कहा, और नाही
मैं वैसा सोचता हूं । क्यूंकि मैंने अपने मन को सोच को कई विचार धाराओं से उपजाया है।
पर आप ये बताईए आप उनके सिद्धांतों को विचारों को जानते हैं ।
“गांधी जी ने ही कहा था, हमारा भारत मानवता का समंदर है, जो कुछ बूंदों के मैले होने से पूरा मैला नहीं हो सकता।”

यह देश वह सागर है, जो विभिन्न प्रकार के धर्म, संस्कार, संस्कृति की बहती नदियों को खुद में समाता है।

ये मैला नहीं हो सकता ।
ये देश महान था ,है और रहेगा ।”

आज भी जो लोग बार बार भारत की महानता को ताक पर रख देते हैं । मैं उनसे यही कहता हूं कि , हां तकलीफ होता है हमें भी ,खून खोलता है हमारा ,जब कुछ बहुत शर्मसार दुर्घटना होती है तो, पर आप लोग उसे ही देश की तस्वीर मत बना दीजिए ।
ये देश महान है।
इन काली करतूतों वालों के चेहरे पर कालिख पोत दीजिए , पर फिर अपने हाथों में लगे कालिख को भारत मां के आंचल में मत पोछ दीजिए ।
मां अपने कपूतों के कुकर्म से पहले ही घायल है, अब आप अपने तानों से और तकलीफ मत दीजिए ।

अटल जी और कई देशभक्तों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर इसे आबाद किया है।

आज पंडित जी की पुण्यतिथि पर मैं शुभंकर उपाध्याय उन्हें झुक कर मन से नमन करता हूं ।

जय हिन्द।

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